रतलाम। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी कपिल वर्मा ने एसपी को वकील सुरेश डागर की दर्दनाक मौत के मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। इलाज के अभाव में मेडिकल कॉलेज से दूसरे अस्पताल जाते समय रास्ते में बाइक पर वकील डागर की मौत हो गई थी। न्यायालय ने एसपी को जांच प्रतिवेदन 25 मई को प्रस्तुत करने के लिए आदेशित किलाम जिला अभिभाषक संघ के पूर्व अध्यक्ष संजय पंवार की ओर से एडवोकेट प्रवीण भट्ट द्वारा न्यायालय में निजी परिवाद प्रस्तुत किया गया था। परिवाद कलेक्टर (अब स्थानांतरित) गोपाल चंद्र डाड, डिप्टी कलेक्टर एवं शासकीय मेडिकल कॉलेज की प्रभारी शिराली जैन, शासकीय मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. जितेंद्र गुप्ता, सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर ननावरे व आयुष हॉस्पिटल बंजली के डॉ. राजेश शर्मा के विरुद्ध प्रस्तुत किया गया था।परिवाद में बताया गया कि एडवोकेट सुरेश पिता रामलाल डागर उम्र 40 वर्ष निवासी टाटानगर रतलाम को बुखार एवं सांस लेने में परेशानी थी। इस पर 4 मई 2021 को उसके भाई अनिल व माताजी उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज ले गए थे। करीब ढाई घंटे इंतजार करने के बाद भी डागर को मेडिकल कॉलेज में उपचार नहीं दिया गया। वजह यह थी कि शहर विधायक चेतन्य काश्यप द्वारा मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर और 60 बेड नए बिस्तरों के वार्ड तैयार करने का आयोजन किया जा रहा था। मेडिकल कॉलेज के डीन सहित जिम्मेदार अधिकारी उक्त आयोजन में व्यस्त थे।मेडिकल कॉलेज से एडवोकेट डागर को आयुष हॉस्पिटल बंजली ले जाकर दिखाया। वहां उपस्थित डॉ. राजेश शर्मा ने सुरेश का ऑक्सीमीटर देखा और कह दिया कि हमारे यहां बेड उबल्ध नहीं है, कहीं और ले जाओ। एडवोकेट डागर का ऑक्सीजन लेवल काफी कम होने और उनकी स्थिति गंभीर होने पर साथी अधिवक्ताओं द्वारा सभी जिम्मेदारों को दूरभाष पर संपर्क किया गया लेकिन कोई बात नहीं बनी। इससे अधिवक्ता साथियों ने सुरेश को काटजूनगर स्थित एक निजी निर्सिंगहोम उपचार हेतु भर्ती किए जाने का प्रबंध किया गया। वहां पहुंचने से पहले ही राम मंदिर चौराहे पर सांस रुक जाने से उनकी दर्दनाक मृत्यु हो गई।परिवाद में बताया गया कि कुछ समय पूर्व प्रशासन द्वारा आदेश जारी किया गया था। इसमें निजी अस्पतालों में कुल क्षमता का 30 फीसदी बेड कोविड पेशेंट के लिए आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए थे। यह व्यवस्था प्रक्रिया में हैं, अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हुई है।परिवाद में बताया गया कि एडवोकेट सुरेश डागर का निधन उपरोक्त जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों की लापरवाही से हुआ। इसी तरह जिला न्यायालय में पदस्थ न्यायाधीश आनंद जंभूलकर को भी 10 दिन तक आयुष हॉस्पिटल बंजली में उपचार के लिए भर्ती रखा गया था। उनका स्वास्थ्य भी 95 प्रतिशत खराब होने के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। अतः दोनों ही मामलों में दोषियों को दंडित किया जाने का निवेदन न्यायालय से किया गया।एडवोकेट भट्ट ने बताया न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद में मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा 19 अप्रैल 2021 को पारित आदेश का हवाला भी दिया गया। इसमें बताया कि न्यायालय द्वारा आदेशित किया गया है कि किसी भी मरीज को उपचार के लिए भर्ती किए जाने, उसे जीवन रक्षक दवाइयां, ऑक्सीजन उपलब्ध करवाए जाने से इनकार नहीं किया जा सकता। बावजूद एडवोकेट डागर को न भर्ती किया गया और न ही उपचार किया गयाएडवोकेट भट्ट के अनुसार जिला न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के प्रावधान अनुसार मामले में अनुसंधान किए जाने की अवश्यकता जताई। इसके लिए एसपी रतलाम को आदेशित किया गया है। पुलिस को अनुसंधान के बाद 25 मई को प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।


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