मंदसौर। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अनुमोदित तीन नवीन कृषि अध्यादेशों को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी महामंत्री महेन्द्रसिंह गुर्जर ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कृषि सुधार और किसानों के हित के लिए अब तक कि सबसे बड़ी मांग स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना है। इसको लागू करने का वादा केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों से किया था लेकिन इसको लागू करने के बजाय किसान विरोधी तीन नए अध्यादेश लाकर यह सिद्ध कर दिया है कि यह किसान विरोधी सरकार है।
श्री गुर्जर ने कहा कि केंद्र सरकार के तीन नए कृषि अध्यादेशों से आने वाले समय में केंद्र सरकार किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म करने जा रही हैं।
इन अध्यादेशों से किसानों को कोई फायदा नही होगा बल्कि बड़ी बड़ी कम्पनियों को सीधे फायदा होगा।
श्री गुर्जर ने कहा कि कृषि उपज की बिक्री कृषि उपज मण्डियों में होती थी अब नए कानून के तहत इसको समाप्त किया जा रहा है।
देश मे 85 फीसदी लघु किसान है उन्हें अपनी फसल बेचकर जल्दी पैसों की जरूरत होती हैं तो ऐसे में वह मजबूरन कम दाम में अपनी फसल बेचेगा।
किसानों के माल खरीदने की इस व्यवस्था से किसानों का शोषण और अधिक बढेगा।
श्री गुर्जर ने कहा कि इस अध्यादेश के तहत आलू, प्याज, दलहन, तिलहन आदि के भंडारण पर लगी रोक को हटा लिया गया है।
हमारे देश के 85 प्रतिशत छोटे किसानों के पास लंबे समय तक अपनी फसल का भंडारण करने की व्यवस्था नही होती हैं अब बड़ी कम्पनियों द्वारा कृषि उत्पादों की काला बाजारी जमकर होगी।
ये कम्पनियों और सुपर मार्केट अपने बड़े बड़े गोदामों में कृषि उत्पादों का भंडारण कर बाद में ऊंचे दामों पर बेचेंगे।
श्री गुर्जर ने कहा कि तीसरे अध्यादेश में कॉन्ट्रैक्ट खेती को बढ़ावा दिया जाएगा जिसमें अडानी, अम्बानी जैसे बड़ी- बड़ी कम्पनियां खेती करेगी और हमारा अन्नदाता किसान उसमें सिर्फ मजदूरी का कार्य करेंगे।
इस नए कानून के तहत किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बनकर रह जायेगा।
श्री गुर्जर ने कहा कि केंद्र सरकार कृषि का पश्चिमी मॉडल हमारे देश के किसानों पर थोपना चाहती हैं लेकिन सरकार यह बात भूल जाती हैं कि हमारे किसानों की तुलना अमेरिका के किसानों से नही हो सकती क्योंकि हमारे यहाँ भूमि, जनसंख्या अनुपात पश्चिम देशों से अलग है और हमारे यहाँ खेती किसानी को जीवन यापन करने के साथ असंगठित क्षेत्र के रूप में एक बड़ा साधन माना जाता है।
विदेशों में यह शुद्ध रूप से व्यवसाय है।
श्री गुर्जर ने कहा कि केंद्र सरकार अमेरिका में फेल हो चुका ओपन मार्केट कमोडिटी हमारे देश में लागू करना चाहती है। वहाँ वॉलमार्ट, नेक्सेस जैसी बड़ी कम्पनियां किसानों की फसलों को खरीद कर ऐसे ही भंडारण कर लेती हैं जिसका परिणाम आज यह है कि अमेरिका में 91 प्रतिशत किसान कर्जदार होकर जिन पर 425 बिलियन डॉलर का कर्ज है। वही 81 प्रतिशत अमेरिकी किसान आज खेती छोड़ना चाहते हैं। अमरीकी किसान आज सिर्फ सरकारी मदद पर टिके हुए हैं आज अमेरिका में किसानों को 242 बिलियन डॉलर लगभग 7 लाख करोड़ रुपये की सरकारी सब्सिडी मिलती है।
श्री गुर्जर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के इस किसान विरोधी निर्णय से हमारे देश के एक बड़े वर्ग के साथ घोर अन्याय हो रहा है।इस प्रकार किसानों की आय को दुगुना करने का वादा करने वाली मोदी सरकार किसानों को उनकी मूल संस्कृति से भी बेदखल करने पर उतारू हो गई है।


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