नतीजे जो भी हो लेकिन सुवासरा उपचुनाव में मुकाबला रोचक ही होग..

✍🏻किशोर मलैया

मंदसौर।सुवासरा विधानसभा उपचुनाव भाजपा के हरदीपसिंह डंग को 15 महीने की कांग्रेस सरकार की प्रणाली के सामने टिकना होगा ,तो वही राकेश पाटीदार को अपना भरोसा जमाने का तगड़ा होम वर्क करना होगा । इस बीच भाजपा की अंदरूनी नाराजगी या दाँव पेच ,एक अलग पहलू है । यदि कोई तीसरा दमदार निर्दलीय दंगल  में आ जाता है तो समीकरण गड़बड़ा भी सकता है । मंचो से बड़े नेताओं के चुनावी पैकेज या घोषणाए अब मतदाता पर असर नही करती दिख रही है । हरदीप वीर जी को कोरोना प्रोटोकाल में जो समय का नुकसान होगा वह विपक्षियों के लीए फील्डिंग जमाने के लिए पर्याप्त हो सकता है , राकेश पाटीदार चुनाव हार गए तो भी उनके आगे संभावनाए हो सकती है ,लेकिन वीर जी का सब कुछ दांव पर है....हालांकि पिछले चुनाव में अंतर 350 वोट का ही था । अब भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार वोट कैसे कवर करते है ,ये देखना दिलचस्प होगा । दोनों पार्टियों की आई टी सेल से जुड़े कार्यकर्ता जो ओछे शब्द सोशल मीडिया में इस्तेमाल कर रहे है ,उस से उन्ही का नुकसान है क्योकि ये जनता के बीच तो शालीन बन कर रहते हैं लेकिन सोशल मीडिया में हद से पार भी दिखाई देते है । जिनका नुकसान उम्मीदवारो को हो सकता है ? जनता की खुन्नस भी तो कोई चीज होती है ना ...कही न कही  आम आदमी को चुनाव से कोई लेना देना नही लगता है ,वो बेचारा पहले ही कोरोना के कारण अपने स्वास्थ्य और काम धंधे को दांव  पर लगा कर बैठा है । शायद आम आदमी तो यही चाह रहा है कि चुनाव निपटे तो फन्द कटे । कांग्रेस और भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता मेहनत तो करेंगे ,लेकिन कही न कही वर्तमान राजनीति में ,उनका भरोसा ढुलमुल भी देखा जा सकता है। किसान ,बेरोजगारी ,विकास के परम्परागत मुद्दों पर दोनों पार्टियां खूब भाषण पेल सकती है ! लेकिन हासिल क्या होना है ... ये शायद सब जानते भी है । छोटे से पंचायत के चुनाव में भी तगड़ी जोर आजमाईश हों जाती है,फिर ये तो विधानसभा चुनाव है ।बरहाल दोनों मुख्य पार्टियों को यह ध्यान रखना होगा कि सभाओ में भीड़ आने से कुछ नही होता, ये भीड़ वोट में तब्दील भी होना चाहिए ?? 

आप चुनाव लड़े सब को शुभकामनाएं .. 

कोरोना से आम जनता अपने स्तर पर लड़ ही रही है । मोहल्ले के सायरन बजाती एम्बुलेंस और PPE किट में आते स्वास्थ्य कर्मी और एम्बुलेंस में बैठ कर कोविड सेंटर जाते लोग ... अब सामान्य आदत सी बन गई है । 

आप तो चुनाव चलने दो , जनता का क्या है , अपना मुकद्दर साथ लेकर आई है ...

जैसे तैसे कुछ तो कर ही लेगी । चलने दीजिये धक्का मुक्की में चुनाव प्रचार .. अब तो रैपिड टेस्ट की सुविधा है। जो गरीब या मिडिल क्लास पॉजिटिव आएगा, वो अपने अपने ईष्ट देवता को याद करके , बच ही जाएगा ??

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