नीमच। प्रदेश की भाजपा सरकार प्रदेश मे सुशासन होने का दावा कर रही है। लेकिन सरकार के सुशासन का लाभ हकीकत मे आमजन ,किसान और गरीब तबके को मिल रहा है या नही इस पर नजर डाले तो सरकार का यह दावा पुरी तरह से फैल होता नजर आएंगा। प्रदेश के साथ ही सुशासन की बदहाली मनासा की सडको पर देखने को मिल रही है। यहां पर खाद के लिए किसान चक्काजाम कर, सीधे ट्रक से खाद लुटने पर मजबुर होना पड रहा है तो वही निर्दोष और गरीबो की मौत पर उनको न्याय दिलाने के लिए सडको पर लाशो का प्रदर्शन करना पड रहा है। जिसके पीछे प्रशासन और पुलिस दोनो ही जिम्मेदार है। सुशासन की दुर्दशा मनासा सहित जिले मे बिगडने पर सत्ता पक्ष के जिम्मेदार भी मौन है। खराब और भ्रष्ट हो चुके सिस्टम को सुधारने के लिए सत्ता पक्ष और जनप्रतिनिधी भी बेखबर होकर बैठे है। मनासा सडको पर 20 दिनो के भीतर 3 लाशो के साथ आमजन ने न्याय के लिए प्रदर्शन कर सरकार के सुशासन पर सवाल खडे कर दिए है। ये हालात सिर्फ मनासा ही नही प्रदेशभर मे हो रहे है। गरीब और किसान को न्याय दिलाने के लिए सडक पर आकर आवाज मुखर करने पर प्रदर्शनकारीयो और जनप्रतिनिधीयो को प्रशासन और पुलिस कार्यवाही की धमकी देता है क्या यही सुशासन है।बात की जाएं सुशासन के जमीनी स्तर पर अमल की तो जो दावे किए जा रहे ठीक उसके विपरित है। पिछले कुछ दिनो से जो हालात और नजारे जिले और मनासा मे देख्,ाने को मिले वो प्रशासन और पुलिस की अमानवीयता को उकेरता है। यहां पर अपनी ही जमीन पर जाने के लिए रास्ते के लिए आदेश होने के बाद भी सत्ता पक्ष से जुडे पदाधिकारी और एक बेबस किसान को खराब हो चुके सिस्टम से तंग आकर दुनिया छोडने पर मजबुर होना पड गया। और आखिर मे हुआ क्या सिर्फ दोषी प्रशासनिक कारिंदो पर निलंबर की कार्यवाही । प्रशासन ने आखिर उनके खिलाफ अभी तक एफआईआर क्यो नही दर्ज करवाई। वही मनासा की सडको पर 20 दिनो मे जो लाशो के साथ सडक पर प्रदर्शन हुए उन्हे देखते हुए नही तो पुलिस और नही प्रशासन यहां तक की सत्ता पक्ष के लोगो को भी लैस मात्र फर्क नही पडा। आखिर पडे भी तो क्यो क्योकि मरने वाला नही तो प्रशासन , पुलिस और नही सत्ता पक्ष का सगा सबंधी जो नही थे। वो कोई मजदुर था तो कोई किसान भला इन दोनो वर्ग के मरने से कोई फर्क नही पडता यही शासद हमारे सुशासन देने वालो की सोच हो ! यही अगर किसी प्रभावी व्यक्ति का नाते रिश्तेदार होता तो हो सकता ऑफिस मे बैठकर ही न्याय मिल जाता और दोषियो पर कार्यवाही हो जाती। सिर्फ लाशो की बात नही है यहां पर तो किसान खाद के लिए ब्लैक मे अधिक दाम देकर खाद खरीदने पर मजबुर है। दो बैग के लिए दो दिन का समय जाया करने के बाद भी खाली हाथ घर लौटने पर मजबुर होना पड रहा है। किसानो को बिजली नही बिजली के इंतजार मे रात खेतो मे गुजारना पड रही है। लाशो के साथ सडक पर प्रदर्शन पर एक नजर
मामला नंबर 01 - 21 सितंबर को गायत्री नगर मे एक मकान निर्माण कार्य के दौरान गरीब मजदुर की मकान की छत के उपर से गुजर रहे हाईटेंशन बिजली के तार से टकराने पर मजदुर को करंट लगने से मौत हो गई। मकानो की छत से गुजर रहे तार से हादसा होने की संभावना को देखते हुए रहवासीयो ने बिजली विभाग को तार हटाने के लिए शिकायत की थी। उसके बाद भी बिजली विभाग नही जागा और उसका खामियाजा एक गरीब मजदुर को अपनी जान गवां कर चुकाने पर मजबुर होना पडा। उसके परिजनो को न्याय दिलाने और आर्थिक मदद के लिए कांग्रेस सडक पर उतरी और सरकारी अस्पताल के सामने ष्शव सडक पर रखकर प्रदर्शन कर न्याय की गुहार लगाई।
मामला नंबर 02 - 1 दिसंबर को नगर की पुलिस कॉलोनी के पीछे रहने वाले हम्माली करने वाले मजदुर ने पुलिस प्रताडना से तंग आकर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जवानो के खिलाफ कार्यवाही की मांग और मृतक के परिजन को 50 लाख की मांग को लेकर बंजारा नेता आर. सागर कछावा और कांग्रेस के जिला कार्यवाहक अध्यक्ष चंद्रशेखर पालीवाल , पार्षद प्रतिनिधी दिनेश राठौर ने ष्परिजनो के साथ पुलिस थाने के सामने सडक पर युवक की लाश रखकर प्रदर्शन किया। न्याय के लिए 6 घंटे तक विरोध किया। लेकिन चार घंटे तक कोई भी प्रशासन का नुमाइंदा नही पहुचा। और उल्टा पुलिस ने उसे दो केस मे आरोपी बता दिया। और आखिर मे शाम होते होते प्रशासन ने 50 लाख का प्रपोजल भेजने और 15 हजार रेडक्रास के माध्यम से देने का भरोसा दिया। वही पुलिस ने 4 पुलिसकर्मीयो को सिर्फ लाइन अटैच करने की कार्यवाही कर प्रदर्शनकारीयो को शांत किया।
मामला नंबर 03 - 12 नवंबर को चचौर के किसान के साथ मछली ठेकेदार के लोगो ने रास्ते मे निकलने की बात पर हथियारो से लैंस होकर हमला कर दिया। जिसकी उपचार के दौरान उदयपुर मे मौत हो गई। मछली ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही करने और पिडित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जिला कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष चंद्रशेखर पालीवाल कार्यकर्ताओ और परिजनो के साथ मे मत्स्य विभाग के कार्यालय के सामने 4 घंटे तक नीमच झालावाड रोड पर चक्काजाम किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियो को हटाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने सख्ती दिखाई लेकिन वे नही डरे और नही हटे। परिणाम यह रहा कि पिडित परिवार को मछली ठेकेदार ने 2 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की और परिवार के दो लोगो को नौकरी देने का वादा किया। उसके बाद चक्काजाम समाप्त किया। वही पुलिस ने पहले ही तीन आरोपीयो के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। खैर जो भी हो लेकिन मनासा और जिले मे सुशासन की इन घटनाक्रम के माध्यम से सच्चाई उजागर होती नजर आ रही है। अगर भाजपा को सुशासन के वादे को हकीकत मे जमीन पर उतारना है तो इसके लिए सत्ता पक्ष से जुडे जनप्रतिनिधीयो को बेलगाम हो चुके प्रशासन पर अंकुश लगाना होगा।


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