मंदसौर से प्रतापगढ़ जाने वाले व्यस्त मार्ग पर सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब माल्या खेड़ी स्थित यात्री प्रतीक्षालय के पास एक चलती बस के चालक, परिचालक और खलासी और एक शराबी के बीच जमकर मारपीट हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद करीब 10 से 15 मिनट तक चलता रहा। बस सड़क किनारे खड़ी रही और अंदर बैठे यात्री भयभीत नजर आए। लात-घूंसे चलते रहे और आमजन तमाशबीन बने रहे।
बताया जा रहा है कि विवाद की जड़ शराब का नशा था। आरोप है कि एक शराबी नशे की हालत में था, जिससे बस स्टॉफ की कहासुनी बढ़ते-बढ़ते हाथापाई में बदल गई। इस दौरान बस में सवार महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में दहशत का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन हालात बेकाबू रहे।
यह मार्ग पहले भी लापरवाह ड्राइविंग और हादसों को लेकर सुर्खियों में रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार प्रशासन और आरटीओ सख्ती बरतते, तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता था। सवाल उठता है कि क्या बस चालकों और स्टाफ की नियमित जांच होती है? क्या नशे में वाहन चलाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है?
जहां एक ओर प्रशासन बाइक सवार गरीब लोगों के चालान काटने में सक्रिय दिखाई देता है, वहीं सार्वजनिक परिवहन की बसों पर निगरानी की कमी साफ नजर आती है। नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ती बसें कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती हैं।
जनता ने मांग की है कि जिम्मेदार आरटीओ तत्काल जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ न हो और सड़क पर कानून का राज कायम रहे।



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