मंदसौर में नियमों की धज्जियाँ: हाईवे किनारे शराब दुकानें बन रहीं हादसों का अड्डा


मंदसौर।जिले में आबकारी विभाग द्वारा भले ही शराब दुकानों का आवंटन नियमों के तहत टेंडर प्रक्रिया से किया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जिले के कई क्षेत्रों में ठेकेदार खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर शराब दुकानों का संचालन कर रहे हैं, जिससे जनजीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।


सूत्रों के अनुसार आक्या क्षेत्र में संचालित शराब दुकान नेशनल हाईवे के बेहद करीब स्थित है, जहां आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मौन साधे बैठा है।

यही स्थिति दलोदा, धुंधड़का, अफजलपुर और सीतामऊ रोड की दुकानों की भी है। सड़क किनारे खुलेआम शराब बिक्री और वहीं बैठकर सेवन करने से लोग नशे की हालत में वाहन चला रहे हैं, जिससे गंभीर सड़क हादसे हो रहे हैं। कई निर्दोष लोगों की जान तक जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।

📌 अवैध शराब का जाल: “डायरी सिस्टम” से गांव-गांव तक सप्लाई

स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब पूर्व में बंद हो चुकी दुकानों के स्थानों पर अब अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। इतना ही नहीं, “डायरी सिस्टम” के जरिए गांव-गांव में शराब की सप्लाई की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है।


📢 मुख्यमंत्री के आदेशों की खुली अवहेलना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भगवान पशुपतिनाथ महादेव की पवित्र नगरी में शराब बिक्री पर प्रतिबंध के निर्देश दिए गए थे, लेकिन हकीकत यह है कि उन्हीं स्थानों पर अब अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। यह प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।

🛑 अब उठ रहे ये बड़े सवाल:

क्या आबकारी विभाग आंखें मूंदे बैठा है?

क्या ठेकेदारों को नियमों से ऊपर मान लिया गया है?

आखिर कब रुकेगा अवैध शराब का यह खेल?

⚖️ *जनहित में प्रमुख मांगें:*

✔️नियमों के विरुद्ध संचालित सभी शराब दुकानों की तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई

✔️नेशनल हाईवे व मुख्य सड़कों के पास स्थित दुकानों को तत्काल हटाया जाए

✔️अवैध शराब बिक्री और “डायरी सिस्टम” पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए

✔️जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जाए

✍️ *निष्कर्ष: अगर समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह लापरवाही और भी बड़े हादसों को न्योता दे सकती है। जनता अब जवाब चाहती है—और कार्रवाई भी।*

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